सारी समस्या की जड़ EVM

 जिस देश में वोट वापसी के कानून, जूरी के कानून, रेफरेंडम के कानून नहीं होते वहां की जनता हर समय एलीट के द्वारा पिसती रहती है और बलवा को तैयार रहती है, इसी वजह एलीट हमेशा चौकन्नी रहती है और हर दस साल में कोई न कोई अपना नुमाइंदा नागरिकों को देती रहती है, या कोई न कोई व्यक्ति इस समय को पहचान कर उनका नुमाइंदा बन जाता है और नागरिकों को लगता होता है कि 'वो' उनका है और उसके द्वारा एलीट ये सुनिश्चित करते है कि बलवा कही नया राजनीतिक विकल्प खड़े करने की दिशा में ना चला जाए । एलीट अपने उस नुमांइदे द्वारा लोगो को काबू करवा के रखते है ताकि लोग उसके बताए अनुपयोगी कामों में अपना समय खराब कर देवे ।

मै ज्यादा पुरानी बात तो नहीं करूंगा, इतिहास भरा है ऐसे उदाहरणों से, पर आज के समय में कुछ उदाहरण है जैसे कि सन

2009 तक आते आते कांग्रेस के प्रति भयंकर बलवा की लहर उस समय लोगो में थी, राजीव भाई दीक्षित जो कि पिछले 20 साल से घूम घूम कर स्वदेशी प्रोडक्ट्स को अपनाने के लिए लोगों को प्रेरित करते थे, उनको स्वामी रामदेव ( उस समय वो स्वामी थे ) का साथ मिला और उन्होंने 2014 में पॉलिटिकल पार्टी बना कर चुनाव लड़ने की घोषणा की इसके साथ ही राइट टू रिकॉल सांसद विधायक, कानून को लागू करने की भी घोषणा की । इस के तुरंत बाद ही उनकी हत्या हो गई ।

अब भारत के लाखों कार्यकर्ता जो उनके भारत स्वाभिमान आंदोलन से जुड़ गए थे, वे लोग दिशाविहीन हो गए, उनको कुछ समझ ही नहीं आया कि क्या करे, अंत में एलीट ने धूर्त केजरीवाल को पैड मीडिया प्रचार दिलवा कर ने इन कार्यकर्ताओं को लपकवा  दिया और लाखों कार्यकर्ता फेक पॉलिटिकल अल्टरनेटिव आम आदमी पार्टी को विकल्प मान कर अच्छे कानूनों को लागू करवाने की दिशा में काम करने के बजाय, केजरीवाल की गुलामी में लग गए । वहीं कुछ कार्यकर्ता जो राजनीतिक अल्टरनेटिव की दिशा में काम नहीं करना चाहते थे उन लोगों को रामदेव ने अपने प्रोडक्ट्स का ग्राहक बना कर चिपका लिया और पतंजलि खड़ी कर ली ।

अब 10 साल बीतने के बाद, 2019 में जब दुबारा बलवा के लिए नागरिक तैयार थे, उसी समय एलीट ने EVM के द्वारा दुबारा से मोदी को सत्ता सौंप दी, और सत्ता मिलते ही एलीट ने मोदी द्वारा नागरिकों की जबरन लॉकडाउन और जबरन वैक्सीनेशन के कानून लागू करके लोगो की चमड़ी उधेड़ना शुरू किया । 

फिर इसी दौरान पुनः ऐसे लोग मीडिया और सोशल मीडिया में छाने लगे जो एलीट का नुमांइदा बनने के लिए तड़प रहे थे, उनमें से एक था विषरूप राय चौधरी और एक था देवेंद्र बल्हारा । दोनों ने शुरुआती दौर में इस तरह का अभिनय किया जैसे कि ये जबरन लॉक डाउन और जबरन वैक्सीन के विरोधी है, पर इन्होंने कभी भी कार्यकर्ताओं को ये नहीं कहा कि कार्यकर्ता ये मांग करे प्रधानमंत्री से की प्रधानमंत्री को सभी कार्यकर्ता सार्वजनिक पत्र भेज कर आदेश देवे की बाध्यकारी लॉकडाउन और जबरन वैक्सीन का कानून हटाया जाए ।

बल्कि इन्होंने सिर्फ सुप्रसिद्धि के लिए कार्य किया, अंत में स्वप्रसिद्धि को भुनाते हुए 2, 3 साल में ही, विश्वरूप ने रामदेव के मॉडल पर काम करते हुए नीम हकीम सेंटर HIIMS पूरे भारत में खोल दिए और 1000 करोड़ का धंधा बना लिया । वहीं दूसरी ओर बल्हारा ने जनता सरकार मोर्चा नामका फ्रॉड संगठन जैसे केजरीवाल ने परिवर्तन बनाया था ठीक इसी तर्ज पर JSM बनाया और पूरे देश में इसकी शाखाएं खोल कर लोन अदायगी की फ्रॉड बाजी करके करोड़ों रुपए बनाना शुरू किया ।

हालांकि दोनों के ही करीबियों ने वीडियो जारी करके दोनों की ही फ्राऊडबाजी जनता के सामने रख दी, पर पैड सोशल मीडिया ने इनको इतना फेम दे दिया है कि अब इनको उतना फर्क नहीं पड़ता ।

और इसी तरह से 2024 में ईवीएम हटाओ सेना के राहुल मेहता की बनाई मशीन और पवन जूरी के देश भर में डेमो के प्रदर्शन का पूरा लाभ सुप्रीम कोर्ट के वकील महमूद परचा और भानु प्रताप ने उठाया और दोनों समाजवादी पार्टी से लोकसभा का टिकट लेने पहुंच गए, हालांकि गंभीरता की कमी की वजह से इन लोगों को टिकट भी नहीं मिला और कोई ज्यादा बड़ा लाभ भी नहीं ले पाए, हालांकि प्राचा अभी भी अन्य पार्टियों से चुनाव रद्द करवाने के नाम पर पीटीशन लगाने के धंधे में तो है । 


तो इस प्रकार से समय समय पर इस तरह के लोग रहेंगे जो एक्टिविज्म दिखा कर धंधा खड़ा कर लेंगे और कार्यकर्ताओं का समय ऊर्जा धन मेहनत सब कुछ अपने स्वार्थ में खर्च करवा लेंगे ।


अब यदि इसके रूट में जाए तो पता चलता है कि ये सब फ्रॉड लोग फेमस क्यों होते है तो उसकी वजह है पैड मीडिया और पैड सोशल मीडिया, तो ये जो दोनों प्रकार के मीडिया है ये एलीट के द्वारा चलाए जा रहे है और एलीट मीडिया चलाने का पैसा, खदानों से निकलने वाले मिनरल से बनाता है और एलीट को खदाने मिल रही है पॉलिटिकल पार्टी बीजेपी कांग्रेस आप जैसी पार्टियों के लीडरों को जितवाने से और जितवाया जा रहा है EVM में काले कांच लगा कर ।


इसलिए सारी समस्या की जड़ EVM है यदि EVM समाप्त होती है तो पैड मीडिया और पैड सोशल मीडिया कमजोर पड़ेगा और इस तरह के फ्रॉड एक्टिविस्ट अन्य कार्यकर्ताओं का दोहन नहीं कर पाएंगे, फलस्वरूप कमिटेड कार्यकर्ता आगे बढ़ पाएंगे ।



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