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सारी समस्या की जड़ EVM

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 जिस देश में वोट वापसी के कानून, जूरी के कानून, रेफरेंडम के कानून नहीं होते वहां की जनता हर समय एलीट के द्वारा पिसती रहती है और बलवा को तैयार रहती है, इसी वजह एलीट हमेशा चौकन्नी रहती है और हर दस साल में कोई न कोई अपना नुमाइंदा नागरिकों को देती रहती है, या कोई न कोई व्यक्ति इस समय को पहचान कर उनका नुमाइंदा बन जाता है और नागरिकों को लगता होता है कि 'वो' उनका है और उसके द्वारा एलीट ये सुनिश्चित करते है कि बलवा कही नया राजनीतिक विकल्प खड़े करने की दिशा में ना चला जाए । एलीट अपने उस नुमांइदे द्वारा लोगो को काबू करवा के रखते है ताकि लोग उसके बताए अनुपयोगी कामों में अपना समय खराब कर देवे । मै ज्यादा पुरानी बात तो नहीं करूंगा, इतिहास भरा है ऐसे उदाहरणों से, पर आज के समय में कुछ उदाहरण है जैसे कि सन 2009 तक आते आते कांग्रेस के प्रति भयंकर बलवा की लहर उस समय लोगो में थी, राजीव भाई दीक्षित जो कि पिछले 20 साल से घूम घूम कर स्वदेशी प्रोडक्ट्स को अपनाने के लिए लोगों को प्रेरित करते थे, उनको स्वामी रामदेव ( उस समय वो स्वामी थे ) का साथ मिला और उन्होंने 2014 में पॉलिटिकल पार्टी बना कर चुनाव लड...

लोकसभा नहीं, विधानसभा नहीं — सबसे बड़ी ग्रामसभा!

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 📢 लोकसभा नहीं, विधानसभा नहीं — सबसे बड़ी ग्रामसभा! सोचिये! 17वीं–18वीं शताब्दी में गांव और उत्पादन आधारित अर्थव्यवस्था के कारण भारत की GDP 23% थी। आज शहर और विपणन आधारित अर्थव्यवस्था के कारण भारत की GDP सिर्फ 9% है। शहर अंग्रेजों की डार है… व्यवस्था है जिसे अंग्रेजों ने भारत को कमजोर करने के लिए बनाया। उन्होंने रुपये का कूटकरण किया, गांवों को बर्बाद किया। नयी वैश्विक व्यवस्था (NWO) के दबाव में आज भी सरकार गांवों को बर्बाद करने के लिए ग्रामसभा की जमीनें चौड़ी सड़कों, विकास, शहरीकरण के नाम पर उन कंपनियों को सीप रही है जिनमें यूरोपीय मूल के अमेरिकी लुटेरों का पैसा लगा है। सरकार की नजर आपकी खेती पर भी है, क्योंकि सरकार जानती है— जब तक गांव भोजन उगाते रहेंगे, जनता को गुलाम नहीं बनाया जा सकता। विकास और शहरीकरण = ठेकेदार कल्याण योजना यह जनता को टैक्स के जाल में फंसाने का तरीका है। पंजाब के किसानों ने भूमि अधिग्रहण का विरोध किया तो पूरे पंजाब को डुबो दिया गया। मध्य प्रदेश में बिना मुआवजा भूमि अधिग्रहण कानून लागू हो चुका है। जहाँ मुआवजा मिल भी रहा है, वह कागज की अवैध मुद्रा कब तक चलेगी? ज...

CBDC

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 ❗ सावधान ❗ 140 करोड़ मुर्दों ❗ डिजिटल गुलामी करने के लिए तैयार हो जाओ ❗ क्योंकि कानून पास हो गया है ❗ अब CBDC के सोशल क्रेडिट कार्ड सिस्टम SCCS से देश चलेगा ❗ क्योंकि उनको सभी कागज का नोट बंद करके हवा में पैसा बनना है ❗और अंधों ❗ को मूर्ख बनाकर उनके सब साधन, संसाधनों को लूटना है ❗जनता जीने को ही विकाश कहेगी यह स्थिति पैदा की जाएगी ❗ जनता सरकार का आजीवन गुलामी स्वीकार कर भिखारियों के तरह लाइन में लगकर भीख मांग मांग कर खाएगी देख लेना ❗.. सेंट्रल बैंक डिजीटल करेंसी  💰 CBDC: आज़ादी के नाम पर नियंत्रण का सबसे बड़ा तंत्र > जिस दिन आपका पैसा आपकी जेब से निकलकर किसी एल्गोरिद्म के सर्वर में पहुँचेगा — उसी दिन आपकी आज़ादी की आख़िरी साँस वहीं दर्ज हो जाएगी। आने वाला समय ऐसा होगा जब “कैश” रखना अपराध माना जाएगा, और “डिजिटल वॉलेट” आज्ञाकारिता का प्रमाणपत्र। उस दौर में मुद्रा नहीं, मनुष्य को प्रोग्राम किया जाएगा।  CBDC क्या है — और इसे कैसे प्रस्तुत किया जा रहा है CBDC यानी Central Bank Digital Currency, सरकार द्वारा जारी की गई “डिजिटल मुद्रा” है — जिसे काग़ज़ी नोटों का आधुनिक और “...

Transfer of Power 1947

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 1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि — सत्ता हस्तांतरण (Transfer of Power 1947)  तारीख: 15 अगस्त 1947  मुख्य व्यक्ति: लॉर्ड माउंटबेटन — भारत के अंतिम ब्रिटिश वायसराय पंडित जवाहरलाल नेहरू — भारत के पहले प्रधानमंत्री मोहम्मद अली जिन्ना — पाकिस्तान के संस्थापक महात्मा गांधी, सरदार पटेल, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद आदि उस समय की राजनीतिक वार्ताओं में महत्वपूर्ण थे  2. यह "स्वतंत्रता" नहीं, बल्कि “सत्ता हस्तांतरण” क्यों कहा गया? भारत में 15 अगस्त 1947 को जो हुआ, वह “Transfer of Power” था — अर्थात् ब्रिटिश शासकों ने प्रशासनिक सत्ता भारतीय नेताओं को सौंप दी, परंतु उन्होंने कई कानूनी और आर्थिक नियंत्रण अपने पास रखे या अपने बनाए कानूनों के अधीन ही सौंपे।  इसके प्रमाण:  (A) Indian Independence Act 1947 यह अधिनियम ब्रिटिश संसद (UK Parliament) ने पारित किया था, भारतीय संसद ने नहीं। भारत की स्वतंत्रता ब्रिटिश संसद की अनुमति से दी गई — यानी यह एक कानूनी हस्तांतरण था, न कि पूर्ण स्वराज इस कानून की धारा 8(2) के अनुसार: जब तक भारत अपनी नई संविधान व्यवस्था नहीं बना लेता, तब तक ब्रिटिश बनाए कानून...

आपका जन्म प्रमाणपत्र एक वित्तीय बॉन्ड है—और आप उसकी ज़मानत देते हैं....!

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 खुलासा: आपका जन्म प्रमाणपत्र एक वित्तीय बॉन्ड है—और आप उसकी ज़मानत देते हैं....! आपके जन्म के क्षण से ही, आप पर नियंत्रण की एक व्यवस्था स्थापित कर दी गई थी। आपका जन्म प्रमाणपत्र सिर्फ़ एक दस्तावेज़ नहीं है—यह एक वित्तीय साधन है, अरबों डॉलर का एक बॉन्ड, जिसका व्यापार एक भ्रष्ट वित्तीय व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए ज़मानत के तौर पर किया जाता है। आप कभी आज़ाद नहीं थे। आपको एक वस्तु, एक मानव संपत्ति में बदल दिया गया जिसका इस्तेमाल राष्ट्रीय कर्ज़ को बनाए रखने के लिए किया जाता है। यह अब तक का सबसे बड़ा धोखा है, और वे कभी नहीं चाहते थे कि आपको पता चले! क्या आपने कभी सोचा है कि हर सरकार जन्म प्रमाणपत्र क्यों मांगती है? यह पहचान का मामला नहीं है—यह स्वामित्व का मामला है। जैसे बंदरगाह पर पहुँचने वाले जहाज़ को अपने माल के लिए एक घोषणापत्र की ज़रूरत होती है, वैसे ही आपका जन्म प्रमाणपत्र इस बात का सबूत है कि आपको उनकी आर्थिक व्यवस्था में संपत्ति के रूप में शामिल किया गया था। आपका नाम बड़े अक्षरों में? यह एक कॉर्पोरेट इकाई है—आपकी क़ानूनी कल्पना। वह लाल सीरियल नंबर?  यह एक स्टॉक एक्सचेंज...

शिक्षा क्रांति

 गाँव की व्यवस्था पर काम करने से पहले गाँव में जाने से पहले की तैयारी❗️किससे कैसे उलझना है, किसको कैसे सुलझाना है ❗️ शिक्षा क्रांति पर पूरी Playlist👇 https://youtube.com/playlist?list=PLjBqYESH9iKNY2k3igqwKcZ_1h7tBcT1U&feature=shared 🕺 जनता सरकार मोर्चा का उद्देश्य, Trainings की Basic समझ के लिए  1️⃣  Playlist👇 👉 https://youtube.com/playlist?list=PLjBqYESH9iKNEc9Z_Rv99Q50FP2R2B0Qx&feature=shared 🎓 एजुकेशन की बेसिक ट्रेनिंग पूरी करें: 👉 https://youtu.be/hH340_Ss1q8?si=Zq8UkG_p6nvrGwXy 📂 अगर चैनल या प्लेलिस्ट ढूंढने में दिक्कत हो तो: 👉 https://youtube.com/playlist?list=PLjBqYESH9iKPLqt-AGPLZcBYhjwoG6RAK&si=RyK13MPwFcLvcKnT 📝 ट्रेनिंग के नोट्स कैसे बनाने और भेजने हैं, ये ऊपर वाली वीडियो में विस्तार से बताया गया है। 👨‍👩‍👧‍👦  तालकटोरा स्टेडियम में Parenting Seminar का पहला भाग: 👉 https://youtu.be/ibGJy1KyxWg 🎙 Check out this (The Longest) Podcast : 👉 https://youtu.be/Er7k4YTRbcg?feature=shared 📕 किताब बुकिंग व सहयोग 🛒 किताब बुक करने के लिए: ?...

1 रूपी नोट भारत सरकार का है

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आपके द्वारा लिखा गया पाठ थोड़ा जटिल और कानूनी–वित्तीय संदर्भ वाला है। मैं इसे सरल और क्रमबद्ध तरीके से समझाने की कोशिश  हूँ: --- 1. स्वकर्ता पितुके जय यह वाक्यांश संभवतः आदिवासी या पारंपरिक संदर्भ में किसी प्रकार के सम्मान या उद्घोष के रूप में लिखा गया है। 2. रेवन्यू (जमीन) भारत सरकार की है भारत की सभी सरकारी भूमि (Revenue Land) भारत सरकार की संपत्ति मानी जाती है। इस पर होने वाली कोई भी आय (उत्पन्न उत्पत्ति) सीधे भारत सरकार की होती है। 3. मूवेबल और इमूवेबल प्रॉपर्टी क्रेडिट Movable Property (मूवेबल) = ऐसी संपत्ति जो स्थानांतरित की जा सकती है, जैसे बैंक बैलेंस, वाहन, मशीनरी आदि। Immovable Property (इमूवेबल) = स्थिर संपत्ति, जैसे जमीन, भवन। इन संपत्तियों का क्रेडिट (संपत्ति का मूल्यांकन/लेनदेन) भारत सरकार के नियंत्रण में होता है। 4. 8/52 खाते और रेवेन्यू टिकट यह सरकारी वित्तीय प्रणाली के अंतर्गत विशेष खाते हैं। कहा जा रहा है कि इन खातों को भारत सरकार की क्रेडिट से चालू किया गया और उसमें “Revenue Ticket” लगाकर लोन के रूप में लोगों को दिया जाता है। 5. करेंसी और प्रोमीसरी नोट 1 रूपी नोट...